Sunday, March 29, 2026
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रंगदूत की प्रस्तुति “महारथी” रही अत्यंत प्रभावशाली

सीधी।

रंगमंच भारतीय संस्कृति की वह जीवंत परंपरा है, जो मनोरंजन के साथ-साथ समाज को सोचने, समझने और आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए सीधी की अग्रणी रंगमंचीय संस्था रंगदूत सीधी द्वारा प्रस्तुत नाटक “महारथी” वास्तव में एक अत्यंत प्रभावशाली, विचारोत्तेजक और सफल प्रस्तुति सिद्ध हुई। दिनांक 24 दिसम्बर 2025 को ज्योत्सना पब्लिक स्कूल, सीधी के प्रांगण में बच्चों, अभिभावकों एवं विद्यालय स्टाफ की गरिमामयी उपस्थिति में इस नाटक का मंचन किया गया। इस अवसर पर लगभग 400 से 500 बच्चे एवं अभिभावक उपस्थित रहे, जिन्होंने पूरे नाटक को अत्यंत एकाग्रता और उत्साह के साथ देखा। नाटक का निर्देशन कुलदीप सोनी द्वारा किया गया, जिन्होंने मंच पर दुर्योधन की भूमिका भी प्रभावशाली ढंग से निभाई। नाटक “महारथी” महाभारत के महान पात्र कर्ण के जीवन पर आधारित है, जिसमें उसके संघर्ष, त्याग, आत्मसम्मान और सामाजिक उपेक्षा को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया। यह नाटक समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव को समाप्त करने, तथा धर्म, सत्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की सशक्त प्रेरणा देता है। नाटक में कर्ण की भूमिका में अमन मिश्रा, श्रिया मिश्रा ने वृषाली के भावपूर्ण अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। द्रोपदी की भूमिका में शिल्पी विश्वकर्मा, अर्जुन की भूमिका में अतुल मिश्रा, द्रोणाचार्य की भूमिका में चंदन पटेल, कुंती की भूमिका में शालिनी विश्वकर्मा तथा कृष्ण की भूमिका में शिवम द्विवेदी ने अपने-अपने चरित्रों को पूरी संजीदगी और प्रभाव के साथ मंच पर जीवंत किया। नाटक की भावनात्मक गहराई को सशक्त बनाने में मंचीय संगीत की महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिसका कुशल संचालन अंबिकेश द्विवेदी द्वारा किया गया। वहीं मंच व्यवस्था, प्रस्तुति और आयोजन को सफल बनाने में अजय दाहिया, अनंत मिश्रा, सुनील कुमार रावत, विशेष भारती, वतन साकेत, निधि कचेर, यादुवेंद्र, राजेंद्र द्विवेदी, वागिश मिश्रा सहित रंगदूत के अन्य कलाकार एवं सहयोगियों का उल्लेखनीय योगदान रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की प्रबंध निदेशक (मैनेजिंग डायरेक्टर) डॉ. श्वेता सिंह ने नाटक की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि “यह नाटक केवल एक कहानी नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि मंच पर किस प्रकार चरित्र जीवित हो उठते हैं। इस प्रकार की प्रस्तुतियाँ बच्चों और समाज—दोनों के लिए अत्यंत शिक्षाप्रद हैं और सभी को इससे सीख लेनी चाहिए।” कार्यक्रम के समापन अवसर पर सुनील कुमार रावत ने मंच से सभी कलाकारों, आयोजक संस्था, विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकगण, स्टाफ, बच्चों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। दर्शकों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति और तालियों की गूंज ने इस सांस्कृतिक आयोजन को अविस्मरणीय बना दिया।

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