संचार साथी पोर्टल (Sanchar Saathi Portal) इन दिनों बड़ी खबरों में है, खासकर इससे जुड़े एक सरकारी आदेश को लेकर उठे विवाद के कारण।
यहाँ इस पोर्टल से जुड़ी ताज़ा जानकारी और इसके उपयोग की मुख्य बातें दी गई हैं:
📱 संचार साथी पोर्टल पर ताज़ा खबर: अनिवार्य प्री-इंस्टॉलेशन का आदेश वापस
1. ताज़ा विवाद और आदेश वापसी
पिछला आदेश (28 नवंबर 2025): दूरसंचार विभाग (DoT) ने स्मार्टफोन निर्माताओं को निर्देश दिया था कि वे भारत में बेचे जाने वाले सभी नए फोनों में ‘संचार साथी’ ऐप को प्री-इंस्टॉल करें और उपयोगकर्ता इसे हटा या डिसेबल (Delete/Disable) नहीं कर सकेंगे।
विवाद: विपक्ष और गोपनीयता के पैरोकारों ने इस आदेश पर कड़ी आपत्ति जताई और इसे नागरिकों की निजता (Privacy) का उल्लंघन और जासूसी (Snooping) का उपकरण बताया।
सरकार की सफाई और वापसी (दिसंबर 2025): विवाद बढ़ने के बाद, सरकार ने सफाई दी और यह आदेश वापस ले लिया। अब यह अनिवार्य नहीं होगा। दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संसद में स्पष्ट किया कि यह ऐप पूरी तरह से स्वैच्छिक (Optional) है और उपयोगकर्ता इसे कभी भी हटा (Delete) या बंद कर सकते हैं।
2. संचार साथी ऐप का मुख्य उद्देश्य और सफलता
संचार साथी पोर्टल एक नागरिक-केंद्रित पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य मोबाइल सुरक्षा बढ़ाना और साइबर फ्रॉड को रोकना है:
विशेषता (Feature) उद्देश्य और सफलता
खोए/चोरी हुए फोन को ब्लॉक करना इस पोर्टल की मदद से लाखों
हुए/खोए हुए मोबाइल हैंडसेट को सफलतापूर्वक ब्लॉक किया गया है और 7 लाख से अधिक फोन उनके मालिकों को वापस लौटाए गए हैं।
फर्जी कनेक्शन की पहचान यह नागरिकों को उनके नाम पर जारी सभी मोबाइल कनेक्शन (SIMs) को देखने और फर्जी/अज्ञात कनेक्शन की रिपोर्ट करने की सुविधा देता है।
