भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहली बार **नेता प्रतिपक्ष** राहुल गांधी को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखने का मौका नहीं दिया गया।
राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष **ओम बिरला** को पत्र लिखकर कड़ा विरोध दर्ज कराया। उन्होंने इसे **लोकतंत्र पर कलंक** और **काला धब्बा** बताया। राहुल ने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर बोलने से रोका गया, जो संसदीय परंपरा का उल्लंघन है।


यह घटना पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अप्रकाशित किताब के अंशों को सदन में पढ़ने की कोशिश के दौरान हुई, जिस पर सरकार ने आपत्ति जताई और स्पीकर ने रोक लगा दी।
राहुल गांधी ने पत्र में लिखा: “यह सिर्फ कन्वेंशन का उल्लंघन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर विपक्ष की आवाज दबाने की साजिश है।”
