इस यात्रा के बाद के प्रमुख घटनाक्रम और परिणाम इस प्रकार हैं:
🤝 मुख्य समझौते और परिणाम
शिखर सम्मेलन में कुल 16 समझौतों पर हस्ताक्षर हुए और दोनों देशों के बीच सहयोग को 2030 तक की रूपरेखा देने वाले विजन डॉक्यूमेंट पर सहमति बनी।
1. व्यापार और आर्थिक लक्ष्य:
द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य: दोनों नेताओं ने 2030 तक वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को $100 अरब डॉलर तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
FTA पर बातचीत: यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द से जल्द साकार करने के लिए बातचीत तेज करने पर सहमति बनी है।
राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के असर से बचने के लिए राष्ट्रीय मुद्राओं (रुपये और रूबल) में व्यापार को बढ़ावा देने पर ज़ोर दिया गया।
2. रक्षा सहयोग:
मेक इन इंडिया: रक्षा सहयोग को खरीदार-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़ाते हुए संयुक्त उत्पादन (Co-production) और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) की ओर ले जाने पर सहमति बनी, जो मेक इन इंडिया को मजबूत करेगा।
दीर्घकालिक अनुरक्षण: रूसी मूल के रक्षा उपकरणों की लंबी अवधि तक सर्विसिंग और स्पेयर पार्ट्स की निर्बाध आपूर्ति पर सहयोग सुनिश्चित किया गया।
3. ऊर्जा और परमाणु सहयोग:
कुडनकुलम परियोजना: कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की शेष इकाइयों के निर्माण में तेज़ी लाने और भविष्य के परमाणु ऊर्जा संयंत्रों के लिए दूसरे संभावित स्थलों पर चर्चा करने पर सहमति बनी।
तेल और गैस आपूर्ति: पुतिन ने भारत को तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति का आश्वासन दिया।
4. श्रम और प्रवासन:
प्रशिक्षित कामगार: रूसी उद्योगों की जरूरतों के अनुसार भारत से प्रशिक्षित कामगारों की आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है।
अनियमित प्रवासन पर सहयोग: अनियमित प्रवासन से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी।
🌎 वैश्विक कूटनीति पर असर (पश्चात घटनाक्रम)
सामरिक स्वायत्तता की पुष्टि: यह यात्रा ऐसे समय में हुई जब वैश्विक तनाव चरम पर है (यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में)। शिखर सम्मेलन ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अपनी सामरिक स्वायत्तता से समझौता नहीं करेगा और रूस के साथ अपने दीर्घकालिक संबंधों को अमेरिकी दबाव से प्रभावित नहीं होने देगा।
अमेरिका की प्रतिक्रिया: रूस के साथ भारत की बढ़ती नजदीकी से चिंतित होकर, अमेरिका ने भारत के साथ व्यापार और टैरिफ पर बातचीत के लिए एक टीम भेजने की योजना बनाई है, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत का कूटनीतिक महत्व और बढ़ गया है।
मल्टी-पोलर वर्ल्ड का संकेत: दोनों देशों के बीच हुए समझौतों ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वे एक बहुध्रुवीय (Multi-Polar) विश्व व्यवस्था के समर्थक हैं, जहाँ किसी एक शक्ति का प्रभुत्व नहीं होगा।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा भारत-रूस संबंधों में ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने वाली रही। इस यात्रा के बाद के प्रमुख घटनाक्रम और परिणाम इस प्रकार हैं
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