मध्य प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस विधायकों ने किसानों की समस्याओं पर सरकार को घेरा, जिससे सदन में भारी हंगामा हुआ। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में विधायक तख्तियां और खेतों के मॉडल लेकर पहुंचे, जहां उन्होंने “चिड़िया चुग गई खेत” का स्लोगन देकर अतिवृष्टि से फसल नुकसान, खाद की किल्लत और मुआवजे में देरी का मुद्दा उठाया।
प्रमुख मुद्दे और आरोप
कांग्रेस ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) न मिलने, खाद-बीज संकट, कर्ज माफी न होने और फसल बीमा राशि की कमी पर तीखे सवाल उठाए। विधायक फूल सिंह बरैया और डॉ. हीरालाल अलावा ने कहा कि किसान मंडियों में उचित दाम न पा रहे और प्राकृतिक आपदाओं का मुआवजा समय पर नहीं मिला। पूर्व सीएम कमलनाथ ने भी सोशल मीडिया पर सरकार की उदासीनता पर निशाना साधा।
हंगामे के दौरान कृषि मंत्री बेहोश
चर्चा के बीच कृषि मंत्री एंदल सिंह कंसाना सदन में बेहोश हो गए, जिसके बाद स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर अस्पताल पहुंचे। विपक्ष ने इसे किसान मुद्दों पर बहस का नतीजा बताया, जबकि सरकार ने 2,068 करोड़ रुपये मुआवजे के वितरण का दावा किया। प्रदर्शन गांधी प्रतिमा के पास और सदन के बाहर भी हुआ।
सरकार का पक्ष
राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने कहा कि अतिवृष्टि प्रभावित किसानों को राहत दी जा चुकी है, लेकिन कांग्रेस ने इसे अपर्याप्त बताया। सत्र गुरुवार तक स्थगित हो गया। यह घटना एमपी के किसान संकट को रेखांकित करती है।
